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इतिहास..


चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान (CCS NIAH), बागपत की स्थापना भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा "राष्ट्रीय पशु चिकित्सा जैविक उत्पाद गुणवत्ता नियंत्रण केंद्र की स्थापना (Establishment of National Veterinary Biological Products Quality Control Centre)" उप-योजना के अंतर्गत, "पशु स्वास्थ्य निदेशालय (Directorate of Animal Health)" केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत भारत में उपयोग किए जाने वाले पशु चिकित्सा टीकों (Veterinary Vaccines) एवं नैदानिक किटों (Diagnostics) की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने हेतु एक राष्ट्रीय सुविधा के रूप में की गई है।

देश में निर्मित पशु चिकित्सा टीकों के गुणवत्ता नियंत्रण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की सुविधा की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही थी। इसी उद्देश्य से पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान "राष्ट्रीय पशु चिकित्सा जैविक उत्पाद गुणवत्ता नियंत्रण केंद्र की स्थापना" को एक पृथक योजना के रूप में शामिल किया गया। इस योजना को छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान विभागीय स्वीकृति समिति (Department Sanctioning Committee) द्वारा अनुमोदित किया गया तथा वर्ष 1983 में 29 पदों के स्टाफ के साथ इसकी व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee – EFC) से स्वीकृति प्राप्त हुई।


आठवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान, विद्यमान राष्ट्रीय पशु चिकित्सा जैविक उत्पाद गुणवत्ता नियंत्रण केंद्र (NVBQPCC) योजना को दो अन्य योजनाओं—पशु संगरोध एवं प्रमाणीकरण सेवाएँ (Animal Quarantine and Certification Services) तथा रोग निदान प्रयोगशालाएँ (Disease Diagnostic Laboratories)—के साथ समाहित कर "पशु स्वास्थ्य निदेशालय (Directorate of Animal Health)" योजना का गठन किया गया। छठी से नौवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि के दौरान विभाग द्वारा उपयुक्त भूमि के चयन एवं अधिग्रहण के अनेक प्रयास किए गए, किन्तु उन्हें अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हुई। इसके पश्चात विशेषज्ञ समिति ने फरवरी 2002 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और अनुशंसा की कि बागपत स्थित चयनित स्थल राष्ट्रीय पशु चिकित्सा जैविक उत्पाद गुणवत्ता नियंत्रण केंद्र (NVBQPCC) की प्रयोगशाला की स्थापना के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रयोगशाला की आधारशिला 2 मार्च 2003 को तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री श्री अजीत सिंह द्वारा रखी गई।


संस्थान की स्थापना वर्ष 2006 में संस्थापक निदेशक के कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात चरणबद्ध (Phased Manner) तरीके से की गई। परियोजना के अंतर्गत सिविल एवं विद्युत कार्यों के निष्पादन का दायित्व उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (Uttar Pradesh State Industrial Development Corporation Ltd. – UPSIDC) को सौंपा गया। इस परियोजना का उद्घाटन 1 सितम्बर, 2010 को तत्कालीन केंद्रीय कृषि, सहकारिता एवं उपभोक्ता मामले मंत्री द्वारा किया गया।

भारत तथा दक्षिण एशियाई क्षेत्र में पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों के गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने हेतु CCS NIAH को एक आत्मनिर्भर एवं स्वतंत्र राष्ट्रीय प्रयोगशाला प्रणाली के रूप में विकसित करना आवश्यक है। इसके लिए संस्थान की अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक भूमिका की स्पष्ट परिकल्पना करते हुए एक दूरदर्शी विजन दस्तावेज़ (Vision Document) के माध्यम से विकास की रूपरेखा तैयार की गई है।

संस्थान का उद्देश्य पशुधन स्वास्थ्य क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों की आवश्यकताओं की पूर्ति करना है, ताकि प्रभावी, सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इससे पशुधन की उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ देश की पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा। वर्तमान समय में रोगों की रोकथाम पर विशेष बल देना अत्यंत आवश्यक है, जिससे एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक एवं अविवेकपूर्ण उपयोग को कम किया जा सके। यह उद्देश्य सुरक्षित एवं प्रभावी प्रतिरक्षण (Immunoprophylactics) के व्यापक उपयोग से प्राप्त किया जा सकता है।

समग्र "वन हेल्थ (One Health)" दृष्टिकोण के अंतर्गत संस्थान की भूमिका सुरक्षित पशु-जनित खाद्य उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित कर मानव स्वास्थ्य को भी सहयोग प्रदान करने तक विस्तारित होगी। साथ ही, जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) एवं पशु चिकित्सा विज्ञान (Veterinary Medicine) के क्षेत्र में हो रहे निरंतर विकास तथा बदलते नियामकीय परिवेश के अनुरूप संस्थान नियामक मामलों (Regulatory Affairs) का प्रभावी प्रबंधन करने की परिकल्पना करता है।

संस्थान का प्रमुख उद्देश्य भारत में उत्पादित अथवा उपयोग किए जाने वाले पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों के लिए उच्चतम गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना है। संदर्भ परीक्षण प्रयोगशाला (Referral Assay Laboratory) के रूप में CCS NIAH द्वारा इन उत्पादों के नियंत्रण एवं विनियमन का कार्य सतत विचार-विमर्श, नियमित समीक्षा तथा निरंतर सुधार पर आधारित एक गतिशील कार्य-योजना (Dynamic Roadmap) के माध्यम से प्रभावी ढंग से किया जाएगा, जो प्रत्येक चरण पर गुणवत्ता का मानदंड (Benchmark) स्थापित करेगी।

लक्ष्य एवं उद्देश्य

संस्थान में दक्षिण एशियाई क्षेत्र, विशेषकर दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के सदस्य देशों के मध्य अग्रणी संस्थान बनने की व्यापक क्षमता विद्यमान है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संस्थान को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने हेतु पूर्णतः तैयार रहना होगा। इनमें प्रभावी नियामक तंत्र (Regulatory Mechanisms) की स्थापना एवं उपयोग के माध्यम से बड़ी संख्या में पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों का गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance) एवं गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) सुनिश्चित करना प्रमुख है।

इसके अतिरिक्त, संस्थान को भविष्य में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों (State-of-the-Art Technologies) का उपयोग करके विकसित किए जाने वाले नवीन पशु चिकित्सा टीकों के परीक्षण हेतु आवश्यक परीक्षण विधियों के साथ तैयार रहना चाहिए। इसके लिए संस्थान के पास अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) का सुदृढ़ आधार होना आवश्यक है।

संस्थान भारत में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के निर्माताओं के मध्य समन्वय स्थापित करने तथा पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों के मानकों के सामंजस्य (Harmonization) हेतु एक साझा मंच के रूप में कार्य कर सकता है। सभी हितधारकों को एक समान कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य करना चाहिए, जिससे पूरे देश में एक समान गुणवत्ता वाले पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।